Home » Shop » Gopal Kavi aur Unki Vrindavan dhamanuragavali | गोपाल कवि और उनकी वृंदावन धामनुरागावली

Gopal Kavi aur Unki Vrindavan dhamanuragavali | गोपाल कवि और उनकी वृंदावन धामनुरागावली

5,500.00

42% Off
Close
Price Summary
  • 9,500.00
  • 5,500.00
  • 42%
  • 5,500.00
  • Overall you save 4,000.00 (42%) on this product
In Stock
Highlights:
  • गोपाल कवि राधा-वल्लभ परंपरा के रसिक भक्त-कवि माने जाते हैं। उनकी काव्यधारा में श्री राधा के प्रति अनन्य प्रेम, सखी-भाव और वृंदावन-रस की गहन अनुभूति प्रमुख रूप से व्यक्त होती है। वे बाह्य आडंबर से दूर, अंतरंग भक्ति और भाव-साधना को प्रधान मानते हैं।

Remove compare
Compare
Description

Gopal Kavi aur Unki Vrindavan dhamanuragavali – एक परिचय

गोपाल कवि राधा-वल्लभ परंपरा के रसिक भक्त-कवि माने जाते हैं। उनकी काव्यधारा में श्री राधा के प्रति अनन्य प्रेम, सखी-भाव और वृंदावन-रस की गहन अनुभूति प्रमुख रूप से व्यक्त होती है। वे बाह्य आडंबर से दूर, अंतरंग भक्ति और भाव-साधना को प्रधान मानते हैं।


📖 “वृंदावन धामानुरागावली” का स्वरूप

वृंदावन धामानुरागावली” नाम से ही स्पष्ट है कि यह काव्य वृंदावन धाम के प्रति अनन्य अनुराग (प्रेम) का संग्रह है। इसमें ब्रजभूमि की महिमा, निकुंज-लीलाओं की रसपूर्ण झलक, तथा राधा-नाम की माधुर्य महिमा का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

🔹 मुख्य विशेषताएँ

  1. वृंदावन की महिमा
    – धाम को दिव्य चेतन सत्ता के रूप में चित्रित किया गया है।
    – प्रत्येक कुंज, वन, यमुना तट को प्रेम-रस से ओतप्रोत बताया गया है।

  2. राधा-केंद्रित भक्ति
    – श्री राधा को ही परम आश्रय और आराध्य रूप में स्वीकार किया गया है।
    – कृष्ण भी राधा के अधीन प्रेमस्वरूप में चित्रित होते हैं।

  3. सखी-भाव की प्रधानता
    – साधक को सखी-भाव से निकुंज-सेवा का अधिकारी बताया गया है।
    – सेवा और स्मरण को साधना का मूल माना गया है।

  4. ब्रजभाषा की मधुरता
    – भाषा सरल, कोमल और रसपूर्ण है।
    – पदों में लयात्मकता और भावप्रवणता विशेष आकर्षण है।


🌸 आध्यात्मिक संदेश

  • वृंदावन केवल भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि हृदय की अवस्था है।

  • जब साधक का मन राधा-नाम में लीन हो जाता है, तभी सच्चा “धाम-अनुराग” प्रकट होता है।

  • बाह्य तीर्थ से अधिक महत्त्व अंतःकरण की शुद्धता और प्रेम का है।

Reviews (0)
0 ★
0 Ratings
5 ★
0
4 ★
0
3 ★
0
2 ★
0
1 ★
0

There are no reviews yet.

Be the first to review “Gopal Kavi aur Unki Vrindavan dhamanuragavali | गोपाल कवि और उनकी वृंदावन धामनुरागावली”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll To Top
Close
Close
Close

My Cart

Gopal Kavi aur Unki Vrindavan dhamanuragavali
Gopal Kavi aur Unki Vrindavan dhamanuragavali | गोपाल कवि और उनकी वृंदावन धामनुरागावली
5,500.00 Add to cart
error: Content is protected !!

Select at least 2 products
to compare