1. Hanuman Prasad Poddar (भाई जी) – सेवा और विनम्रता की मिसाल
Gita Vatika में एक बार कुछ श्रद्धालु दर्शन के लिए आए। वे बड़े उत्साह से भाई जी से मिलने पहुँचे। उस समय भाई जी साधारण वस्त्रों में बगीचे की सफाई कर रहे थे। आगंतुकों ने उन्हें माली समझकर पूछा – “भाई जी कहाँ मिलेंगे?”
भाई जी मुस्कुराए और बोले – “थोड़ी देर बैठिए, अभी आ जाएँगे।”
सफाई पूरी कर वे भीतर गए, वस्त्र बदले और आकर उसी स्थान पर बैठ गए। तब लोगों को ज्ञात हुआ कि जिनसे वे पूछ रहे थे, वही स्वयं भाई जी थे।
शिक्षा:
सच्ची महानता पद या प्रसिद्धि में नहीं, बल्कि विनम्रता और सेवा-भाव में होती है।
2. Jayadayal Goyandka – गीता प्रचार का संकल्प
एक बार किसी ने सेठ जयदयाल जी से पूछा— “आपने व्यापार छोड़कर गीता के प्रचार का कार्य क्यों अपनाया?”
उन्होंने शांत स्वर में उत्तर दिया—
“जब जीवन में गीता का प्रकाश मिला, तब लगा कि यह प्रकाश सब तक पहुँचना चाहिए। यदि ईश्वर ने साधन दिए हैं, तो उनका उपयोग धर्म-प्रचार और लोककल्याण में होना चाहिए।”
इसी संकल्प से Gita Press की स्थापना हुई और गीता सहित अनेक धार्मिक ग्रंथ अत्यंत सुलभ मूल्य पर प्रकाशित किए जाने लगे।
शिक्षा:
जब जीवन में आध्यात्मिक जागरण होता है, तो व्यक्ति केवल अपने लिए नहीं, समाज के लिए भी जीता है।




















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